Monday, February 16, 2026
Monday, February 16, 2026
Monday, February 16, 2026
spot_img
spot_img
A venture of Pen First Media and Entertainment Pvt. Ltd
Member of Working Journalist Media Council Registered by - Ministry of Information and and Broadcasting, Govt. Of India. New Delhi
HomeUncategorizedनाशिक महानगरपालिका चुनाव: लोकतंत्र नहीं, टिकटों का कथित कारोबार

नाशिक महानगरपालिका चुनाव: लोकतंत्र नहीं, टिकटों का कथित कारोबार

By – Waseem Raza Khan

नाशिक महानगरपालिका चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीति का तापमान बढ़ता जा रहा है. दुर्भाग्यवश, इस बार चुनावी चर्चा विकास, जनसमस्याओं या नीति-विमर्श के बजाय टिकट वितरण को लेकर उठे गंभीर आरोपों के इर्द-गिर्द सिमट गई है. राजनीतिक गलियारों और पार्टी के भीतर से उठ रही आवाज़ें यह सवाल पूछने को मजबूर करती हैं कि क्या यह चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया है या फिर टिकटों का एक कथित बाजार?
भाजपा को लेकर यह आरोप सामने आ रहे हैं कि मनपा चुनाव में टिकट वितरण पारदर्शी और योग्यता आधारित न होकर कथित रूप से आर्थिक लेन-देन से प्रभावित है. चर्चा है कि टिकटों के इस कथित खेल में सैकड़ों करोड़ रुपये तक का ‘बाजार’ बन गया है. हालांकि ये आरोप सार्वजनिक बयानों और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी इन्हें पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, क्योंकि शिकायतें केवल विरोधी दलों से नहीं बल्कि खुद पार्टी के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं से सामने आ रही हैं.
सबसे गंभीर सवाल यह है कि वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे निष्ठावान कार्यकर्ताओं को टिकट वितरण में कथित रूप से दरकिनार किया जा रहा है. आरोप हैं कि जमीनी संघर्ष, संगठनात्मक योगदान और जनसमर्थन के बजाय प्रभाव, पहचान और संसाधनों को प्राथमिकता दी जा रही है. यदि ऐसा है, तो यह केवल कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय नहीं, बल्कि आंतरिक लोकतंत्र का भी क्षरण है.
राजनीतिक दल सार्वजनिक मंचों से भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहनशीलता की बात करते हैं, लेकिन जब टिकट वितरण को लेकर इस तरह के सवाल खड़े होते हैं, तो उनकी नैतिक विश्वसनीयता कमजोर पड़ती है. यह मुद्दा किसी एक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक संस्कृति की ओर इशारा करता है जहां चुनाव को सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि निवेश और लाभ का अवसर मान लिया जाता है.
नाशिक की जागरूक जनता को यह सोचने की ज़रूरत है कि क्या वे ऐसे प्रतिनिधि चुनना चाहते हैं जिनकी प्राथमिकता जनहित हो, या फिर वे जो कथित रूप से भारी खर्च के बाद सत्ता के गलियारों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हों. वहीं, राजनीतिक दलों की भी जिम्मेदारी है कि वे इन आरोपों का स्पष्ट और तथ्यपरक खंडन करें या फिर निष्पक्ष आंतरिक जांच के जरिए सच्चाई सामने लाएं.
यदि समय रहते पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो नाशिक महानगरपालिका चुनाव लोकतंत्र के पर्व के रूप में नहीं, बल्कि टिकटों के कथित कारोबार की मिसाल के तौर पर याद किए जाएंगे. यह स्थिति न केवल राजनीति के लिए, बल्कि जनता के भरोसे के लिए भी अत्यंत खतरनाक संकेत है.
राजनीति के इस आधुनिक संस्करण में कार्यकर्ता अब जनसेवक नहीं, बल्कि आशावान ग्राहक बनते जा रहे हैं. वर्षों तक झंडा उठाने, पोस्टर लगाने और गालियां खाने का पारंपरिक पैकेज अब पुराना हो चला है. नया पैकेज है—संसाधन, संपर्क और प्रभाव. जिनके पास यह तीनों हैं, उनके लिए टिकट ‘संभावना’ नहीं, बल्कि ‘प्रक्रिया’ बन जाती है.
व्यंग्य यह है कि जो कार्यकर्ता टिकट से वंचित रह जाते हैं, उन्हें तुरंत अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है. पार्टी में लोकतंत्र तब तक जीवित रहता है, जब तक टिकट आपकी जेब में हो. टिकट नहीं मिला तो सवाल पूछना अनुशासनहीनता और असंतोष कहलाता है. यानी लोकतंत्र एक सशर्त सुविधा है—टिकट सहित.
चुनावी मंचों से भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी-लंबी भाषणबाज़ी होती है, लेकिन टिकट वितरण के समय वही भाषण कहीं फ़ाइलों में दबे नज़र आते हैं. कहा जाता है कि ये सब केवल आरोप हैं, अफवाहें हैं और संभव है ऐसा ही हो. लेकिन जब अफवाहें बार-बार उठें और अलग-अलग दिशाओं से उठें, तो व्यंग्य खुद-ब-खुद गंभीर सवाल में बदल जाता है.
नाशिक की जनता अब दर्शक नहीं रह सकती. क्योंकि अगर टिकट कथित तौर पर निवेश से मिलते हैं, तो वसूली भी कहीं न कहीं से होगी और उसका बोझ अंततः आम नागरिक पर ही पड़ता है. ऐसे में चुनाव जनसेवा का माध्यम नहीं, बल्कि खर्च वसूलने की परियोजना बन जाने का खतरा पैदा हो जाता है.
अंत में यही कहा जा सकता है कि नाशिक मनपा चुनाव में लोकतंत्र पूरी तरह गायब नहीं हुआ है—बस वह टिकट वितरण कार्यालय के बाहर लंबी कतार में खड़ा है, अपनी बारी का इंतज़ार करता हुआ. सवाल यह है कि जब उसकी बारी आएगी, तब तक लोकतंत्र बचेगा या नहीं?

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

Most Popular

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!