Mumbai – Correspondent
कुछ विदाई ऐसी होती हैं जिनका अहसास शुरुआत में वास्तविक नहीं लगता। वे खामोशी से आती हैं और फिर एक अनपेक्षित बोझ बनकर दिल में बैठ जाती हैं। दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले का निधन भी कुछ ऐसा ही है—एक ऐसी शून्यता, जहाँ कभी वह आवाज़ हुआ करती थी जिसने दशकों तक हमारा साथ निभाया। करोड़ों प्रशंसकों के लिए वह केवल एक सराहनीय गायिका नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत थीं जो जीवन के सबसे व्यक्तिगत पलों की पृष्ठभूमि में हमेशा मौजूद रहीं।
92 वर्षीय महान गायिका का निधन 11 अप्रैल को दिल का दौरा पड़ने से हो गया। उन्हें तत्काल ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें आपातकालीन इकाई (इमरजेंसी यूनिट) में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की है।
अंतिम संस्कार का विवरण उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके निवास स्थान पर सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक रखा जाएगा। इसके पश्चात, शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा।
संगीत के एक अध्याय का समापन आशा भोसले के निधन से भारतीय संगीत ने न केवल एक सुरीली आवाज़ खोई है, बल्कि एक पूरे युग को खो दिया है। आशा ताई कभी भी केवल गीतों तक सीमित नहीं रहीं; उनका व्यक्तित्व ऐसा था जिसने कई पीढ़ियों के संगीत के प्रति दृष्टिकोण को आकार दिया। पुराने दौर के गूंजते रेडियो से लेकर आज की डिजिटल प्लेलिस्ट तक, उनकी आवाज़ ने बिना अपनी चमक खोए समय के साथ सहजता से सफर तय किया। उनके जाने से कला जगत में जो रिक्तता आई है, उसकी भरपाई असंभव है।




