By – Waseem Raza Khan (Chief Editor)
मराठी भाषा पर विवाद, खासकर गैर-मराठी भाषी लोगों के साथ होने वाली घटनाओं के संदर्भ में, निश्चित रूप से महाराष्ट्र के पर्यटन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके कई संभावित परिणाम हो सकते हैं जब पर्यटक (चाहे वे देश के भीतर से हों या विदेश से) यह सुनते या देखते हैं कि किसी को भाषा के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है, तो उनके मन में असुरक्षा का भाव पैदा हो सकता है। यह उन्हें महाराष्ट्र की यात्रा करने से हतोत्साहित कर सकता है, खासकर यदि उन्हें लगता है कि भाषा संबंधी बाधाओं के कारण उन्हें किसी अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। हाल ही में महाराष्ट्र में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां गैर-मराठी बोलने वाले ऑटो-रिक्शा चालकों या दुकानदारों के साथ मारपीट की गई है, जिससे एक नकारात्मक धारणा बन सकती है।
पर्यटन उद्योग में विभिन्न भाषाओं को समझने और बोलने वाले लोगों की आवश्यकता होती है, विशेष रूप से होटल, रेस्तरां, टैक्सी और टूर गाइड जैसे क्षेत्रों में। यदि भाषा विवाद के कारण गैर-मराठी भाषी लोगों को असुरक्षित महसूस होता है या उन्हें काम करने में बाधाएं आती हैं, तो इससे पर्यटन क्षेत्र में कुशल कर्मचारियों की कमी हो सकती है। यह बदले में सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा।
राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने भी इस बात पर चिंता जताई है कि भाषाई नफरत से राज्य को नुकसान होगा, साथ ही उद्योग और निवेश पर भी असर पड़ेगा। यदि पर्यटक और निवेशक राज्य में सौहार्दपूर्ण माहौल नहीं पाते हैं, तो वे महाराष्ट्र के बजाय अन्य राज्यों का रुख कर सकते हैं, जिससे पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को नुकसान होगा।
महाराष्ट्र अपनी समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक स्थलों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यदि भाषा विवाद के कारण राज्य की छवि एक ऐसे स्थान के रूप में बनती है जहां भाषाई असहिष्णुता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर पर्यटन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। पर्यटक अक्सर ऐसे स्थानों पर जाना पसंद करते हैं जहां वे स्वागत महसूस करें और उनकी भाषा या संस्कृति को लेकर कोई समस्या न हो। हालांकि किसी विशिष्ट पर्यटन स्थल पर भाषा विवाद के कारण सीधे तौर पर पर्यटकों की संख्या में गिरावट का कोई ठोस डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन हाल की घटनाएं एक उदाहरण पेश करती हैं कि कैसे यह माहौल खराब कर सकता है:
रिक्शा चालक से मारपीट: पालघर जिले में शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के समर्थकों द्वारा एक प्रवासी ऑटो-रिक्शा चालक से मारपीट की घटना सामने आई, क्योंकि उसने मराठी में बात नहीं की और हिंदी में बात कर रहा था। ऐसे वीडियो वायरल होने से गैर-मराठी भाषी पर्यटकों और निवासियों के बीच डर का माहौल बनता है।
दुकानदारों का विरोध: मीरा रोड पर दुकानदारों ने मराठी भाषा को जबरदस्ती थोपने के नाम पर होने वाली “गुंडागर्दी” के खिलाफ प्रदर्शन किया। ये घटनाएं राज्य के भीतर और बाहर से आने वाले लोगों के लिए एक नकारात्मक संकेत भेजती हैं। संक्षेप में, भाषा विवाद सीधे तौर पर पर्यटकों को आकर्षित करने की राज्य की क्षमता को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यह राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाता है और संभावित आगंतुकों के बीच चिंता पैदा करता है। भाषाई सौहार्द और सभी भाषाओं का सम्मान एक सफल पर्यटन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।