Nasik – Waseem Raza Khan
नाशिक जिले की जिला परिषद स्कूलों में छात्रों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. मूलभूत सुविधाओं की कमी, जैसे जर्जर इमारतें, स्वच्छ पेयजल का अभाव और अपर्याप्त शौचालय, छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं. इसके अलावा, स्कूलों में शिक्षकों की कमी और शिक्षण सामग्री की अनुपलब्धता के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है. इन समस्याओं के कारण इन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों का भविष्य अधर में है.
जहां एक तरफ कई जिला परिषद स्कूलों ने निजी स्कूलों को टक्कर देते हुए शानदार और सुंदर इमारतें बनाई हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ जगहों पर छात्र खतरनाक कक्षाओं में जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं. जिले में 800 से अधिक कक्षाएं जर्जर अवस्था में हैं, जिनकी मरम्मत की तत्काल आवश्यकता है. सरकार ने जिला परिषद स्कूलों में छात्रों की ड्रॉपआउट दर को रोकने के लिए ‘प्रगत शैक्षणिक महाराष्ट्र’ जैसी पहल शुरू की है, जिसके तहत ‘वाचन आनंद दिवस’, ‘ज्ञान रचनावाद’, ‘डिजिटल स्कूल’ और ‘अक्षर सुधार कार्यक्रम’ जैसे कार्यक्रम चलाए जाते हैं लेकिन, अपर्याप्त धन और अनदेखी के कारण, जिला परिषद की कई कक्षाएं छात्रों के लिए असुरक्षित बनी हुई हैं.
निधियों की कमी और अनदेखी :
हर साल शिक्षा विभाग जिला परिषद की कक्षाओं के लिए करोड़ों रुपये आवंटित करता है, लेकिन प्रशासनिक देरी और अनदेखी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा होती है. इसके परिणामस्वरूप, कक्षाएं जर्जर हो रही हैं. यू-डायस के आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 803 कक्षाएं खतरनाक स्थिति में हैं, जिसके बाद जिला परिषद से इन कक्षाओं को ठीक करने की मांग बढ़ रही है.
मांग के मुकाबले बहुत कम फंड :
जिला परिषद को नियोजन समिति और सरकार से कक्षाओं के लिए फंड मिलता है. इस साल 132 करोड़ रुपये की मांग के बावजूद, केवल 23.70 करोड़ रुपये ही मिले, जिससे सभी काम पूरे नहीं हो सके. प्राथमिक शिक्षा विभाग ने जिला नियोजन समिति को नई कक्षाओं के निर्माण के लिए 89 करोड़ और मरम्मत के लिए 34 करोड़ रुपये, कुल 132 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सौंपा था, लेकिन नई कक्षाओं के लिए 10.10 करोड़ और मरम्मत के लिए 13.60 करोड़ रुपये, यानी कुल 23.70 करोड़ रुपये ही स्वीकृत हुए. फंड की कमी के कारण मरम्मत का काम कैसे होगा, यह एक बड़ा सवाल है.
प्रतिक्रिया :
मैंने अपने कार्यकाल में जिले के स्कूलों में नई इमारतों और कक्षाओं के लिए करोड़ों रुपये का फंड दिया है. मैंने इसके लिए विशेष रूप से प्रयास किया था और भविष्य में भी अगर मुझे मौका मिला तो मैं और भी अधिक जोश के साथ काम करूंगी. (सुरेखा दराडे, पूर्व शिक्षा सभापती)